झारखंड इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर एसोसिएशन (JECA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार (10 मार्च 2026) को प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 को संसद में पेश किए जाने के विरोध में कार्यपालक अभियंता, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) आदित्यपुर को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने केंद्र सरकार से इस विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर्स एसोसिएशन (AIECA) देशभर के बिजली उपभोक्ताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करता है और प्रस्तावित संशोधन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। उनका कहना है कि इस विधेयक से बिजली क्षेत्र की लोक-उपयोगिता प्रकृति कमजोर हो सकती है तथा उपभोक्ता हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधन Electricity Act, 2003 की मूल भावना के विपरीत है, क्योंकि इसमें उपभोक्ता संरक्षण और सार्वभौमिक उपलब्धता के स्थान पर व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। संगठन का कहना है कि बिजली कोई विलासिता की वस्तु नहीं बल्कि आधुनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक सेवा है, ऐसे में इसका अत्यधिक व्यवसायीकरण आम उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
इसके साथ ही ज्ञापन में यह भी आशंका जताई गई कि विधेयक लागू होने पर बिजली वितरण व्यवस्था के अनियंत्रित निजीकरण का रास्ता खुल सकता है, जिससे निजी कंपनियां केवल लाभकारी क्षेत्रों को चुनेंगी और सामान्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
संगठन ने मांग की है कि बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 को तत्काल वापस लिया जाए और इस विषय पर राज्य सरकारों, बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों सहित सभी हितधारकों के साथ व्यापक एवं पारदर्शी चर्चा की जाए।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में आशीष कुमार धर, लिली दास, मौसुमी मित्रा, विष्णु देव गिरी, बिपिन मंडल, संतोष कुमार, भास्कर गुप्ता समेत लगभग दो दर्जन लोग उपस्थित थे।



