RAMPC 2026 : NIT जमशेदपुर में पदार्थ प्रसंस्करण एवं कैरेक्टराइजेशन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

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National Institute of Technology Jamshedpur के धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग द्वारा सोमवार को DJLHC परिसर में “RAMPC 2026” के द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर पदार्थ प्रसंस्करण, कैरेक्टराइजेशन, सतत प्रौद्योगिकियों एवं उभरते इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों पर विचार साझा किए।
सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के सम्मान समारोह के साथ हुआ। स्वागत भाषण प्रोफेसर रामकृष्ण ने दिया। उन्होंने कहा कि RAMPC 2026 उन्नत पदार्थ एवं प्रसंस्करण तकनीकों पर कार्य कर रहे विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक मंच है।
उद्घाटन सत्र में विभागाध्यक्ष ने पदार्थ विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में अंतःविषयक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं रजिस्ट्रार ने दैनिक जीवन एवं तकनीकी विकास में उन्नत पदार्थों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उपनिदेशक ने ऊर्जा स्थिरता और जलवायु परिवर्तन नियंत्रण में पदार्थ अभियांत्रिकी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए जैव-अवक्रमणीय एवं सतत पदार्थों के विकास की आवश्यकता बताई।
मुख्य अतिथि ने पदार्थों के प्रसंस्करण, संरचना, कैरेक्टराइजेशन एवं प्रदर्शन के बीच संबंधों को विस्तार से समझाया। उन्होंने सेमीकंडक्टर तकनीक समेत आधुनिक इंजीनियरिंग क्षेत्रों में उन्नत पदार्थों की बढ़ती उपयोगिता पर भी चर्चा की। उद्घाटन सत्र का समापन सम्मेलन संयोजक प्रोफेसर प्रकाश सरकार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
उच्च तापमान सिरेमिक कम्पोज़िट्स पर विशेष व्याख्यान
तकनीकी सत्र में प्रोफेसर राहुल मित्रा ने “अत्यधिक उच्च तापमान अनुप्रयोगों हेतु सिरेमिक कम्पोज़िट्स का विकास” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने एयरोस्पेस एवं औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग होने वाले अल्ट्रा हाई टेम्परेचर सिरेमिक्स, ऑक्सीकरण प्रतिरोध, तापीय स्थिरता तथा थर्मल शॉक प्रतिरोध जैसे गुणों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने ज़िरकोनियम डाइबोराइड (ZrB₂) एवं हैफ्नियम डाइबोराइड (HfB₂) आधारित सिरेमिक्स की विभिन्न प्रसंस्करण तकनीकों जैसे हॉट प्रेसिंग, प्रेशरलेस सिंटरिंग एवं स्पार्क प्लाज़्मा सिंटरिंग पर भी चर्चा की। सत्र के अंत में विभागाध्यक्ष द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
सतत निर्माण तकनीकों में सॉलिड स्टेट वेल्डिंग की भूमिका
डॉ. मधुमंती भट्टाचार्य ने “सतत मरम्मत एवं निर्माण हेतु सॉलिड स्टेट वेल्डिंग” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने फ्रिक्शन स्टिर वेल्डिंग, डिफ्यूजन बॉन्डिंग, अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग एवं एक्सप्लोसिव वेल्डिंग जैसी आधुनिक जॉइनिंग तकनीकों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि फ्रिक्शन स्टिर वेल्डिंग (FSW) ऊर्जा-कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है, जो फिलर सामग्री एवं हानिकारक उत्सर्जन को कम करने में सहायक है। व्याख्यान में आधुनिक परीक्षण तकनीकों एवं संरचनात्मक मरम्मत में इन प्रक्रियाओं के उपयोग पर भी चर्चा की गई। सत्र के अंत में प्रोफेसर मोनालिसा मंडल द्वारा डॉ. भट्टाचार्य को सम्मानित किया गया।
नैनोइंडेंटेशन तकनीकों पर प्रोफेसर संध्या वर्मा का व्याख्यान
सम्मेलन के दौरान प्रोफेसर संध्या वर्मा ने “सटीक नैनोइंडेंटेशन मापन की दिशा में : एक नई थर्मल ड्रिफ्ट करेक्शन विधि” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने हार्डनेस एवं इलास्टिक मॉड्यूलस जैसे सूक्ष्म यांत्रिक गुणों के सटीक मापन में आधुनिक नैनोइंडेंटेशन तकनीकों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने “Prior Drift Monitoring (PDM)” नामक नई तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि यह पद्धति नैनोइंडेंटेशन मापों की सटीकता एवं विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है। सत्र के अंत में विभागाध्यक्ष द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
शोध एवं नवाचार को मिला बढ़ावा
RAMPC 2026 सम्मेलन ने शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां उन्नत पदार्थों, सतत प्रसंस्करण तकनीकों, आधुनिक वेल्डिंग पद्धतियों एवं नैनोइंडेंटेशन तकनीकों से जुड़े नवीन शोध एवं तकनीकी विकास पर सार्थक चर्चा हुई। सम्मेलन का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जिसने प्रतिभागियों को भविष्य में शोध, सहयोग एवं नवाचार के लिए प्रेरित किया।

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